इधर उधर की बातें।

चुगलखोरी एक बड़ी ही मज़ेदार चीज़ है, लेकिन सिर्फ तब जब ये दूसरो के बारे में हो। जिस दिन अपने बारे में सुन लो वो बुराई कहलाने लगती है। तो यहाँ तात्पर्य ये है की इस ब्लॉग के ज़रिये मैं चुगली और बुराई दोनों ही करना चाहूंगी। और हाँ दुनिया की बड़ी-बड़ी बातें भी, अगर मौका लगा तो।
तब तक के लिए

धन्यवाद